Wednesday, April 23, 2025

सविनय अवज्ञा आन्दोलन के लिए उत्तरदायी परिस्थितियाँ या कारण

 1. लार्ड इरविन की घोषणा लार्ड इरविन ने घोषणा कर दी थी कि भारत को औपनिवेशिक स्वराज्य प्रदान किया जायेगा। 


2. भारतीयों में उत्साह-इरविन उ‌द्घोषणा पर भारतवासियों ने वायसराय को धन्यवाद दिया।


3. उद्घोषणा की अनिश्चितता उ‌द्घोषणा में स्वराज्य की तिथि निश्चित नहीं की गई। अतएव जवाहरलाल नेहरू तथा सुभाषचन्द्र बोस ने कांग्रेस की कार्य समिति से त्याग पत्र दे दिया।


4. कांग्रेस की अवहेलना कांग्रेस ने सरकार से प्रार्थना की कि यह राजनैतिक बन्दियों को रिहा कर दे किन्तु सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया।


5. इंग्लैण्ड द्वारा उ‌द्घोषणा का विरोध-इंग्लैण्ड के अनुदारवादियों ने इरविन की उद्घोषणा की कटु आलोचना की। अतः भारतवासियों को इंग्लैण्ड की सरकार से स्वराज्य प्राप्त करने की कोई आशा न थो।


6. इरविन गांधी मतभेद 22 दिसम्बर को गांधीजी ने लार्ड इरविन से भेंट की और यह आश्वासन माँगा कि लन्दन की गोलमेज परिषद् में भारत के औपनिवेशिक स्वराज्य पर विचार किया जावेगा किन्तु उन्हें उसका कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला।


7. कांग्रेस द्वारा पूर्ण स्वराज्य की माँग-1929 ई. में कांग्रेस ने लाहौर अधिवेशन में उ‌द्घोषित कर दिया कि काँग्रेस का उ‌द्देश्य भारत के लिए पूर्ण स्वराज्य प्राप्त करना है। इस अधिवेशन में यह भी निश्चय किया गया कि 26 जनवरी का दिन प्रतिवर्ष स्वाधीनता दिवस के रूप में मनाया जायेगा।


8. अंग्रेजों से सम्बन्ध-विच्छेद का निर्णय 26 जनवरी 1930 ई. के दिन पूर्ण स्वराज्य दिवस मनाया जाने की उद्घोषणा कर दी गई और यह कह दिया कि भारतवर्ष को अंग्रेजों से सम्बन्ध विच्छेद करके पूर्ण स्वराज्य प्राप्त कर लेना चाहिए।


9. स्वाधीनता संग्राम दिवसोत्सव- लाहौर अधिवेशन के उपरान्त कांग्रेसी सदस्यों ने कौंसिल से त्याग-पत्र दे दिये और 26 जनवरी को धूमधाम से स्वाधीनता दिवस मनाया गया।


10. नेताओं द्वारा त्याग-पत्र-सरकार ने जनता के उत्साह व राष्ट्रीय भावना को कुचलने के लिए कांग्रेसी नेताओं को जेल में दूँस दिया। अनेक नेताओं ने त्याग पत्र दे दिये।'


11. कृषको की आर्थिक दशा-कृषकों की आर्थिक दशा भी विश्वव्यापी मन्दी के कारण काफी बिगड़ चुकी थी।


12. मजदूर आन्दोलन-मजदूर आन्दोलन की दशा अधिक शोचनीय थी और उसमें साम्यवादी विचारों का उदय हो रहा था। सरकार मजदूर आन्दोलन को रोक नहीं पा रही

Tuesday, April 22, 2025

Mahatma Gandhi ki kahani

 महात्मा गांधी, जिनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था, भारत के एक महान राष्ट्रवादी नेता, समाज सुधारक और "राष्ट्रपिता" (राष्ट्रपिता) के रूप में जाने जाते हैं। उनका जन्म 2 अक्टूबर 1869 को पोरबंदर, गुजरात में हुआ था, और उनकी मौत 30 जनवरी 1948 को हुई थी।


गांधी जी के बारे में कुछ मुख्य बातें:

🎓पढ़ाई: गांधी जी ने इंग्लैंड जाकर कानून की पढ़ाई की और एक वकील बने।


🌍 दक्षिण अफ्रीका: अनहोन साउथ अफ्रीका में पहली बार सहयोग और अहिंसा का प्रयोग किया, जहां अनहोन रंगभेद (जाति भेदभाव) के खिलाफ संघर्ष किया।


✊ अहिंसा और सत्याग्रह: गांधी जी का जीवन दर्शन "अहिंसा" (अहिंसा) और "सत्याग्रह" (अहिंसा के माध्यम से सत्य और प्रतिरोध) पर आधारित था।


🇮🇳स्वतंत्रता आंदोलन: उन्होन भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में कई बड़े आंदोलन का नेतृत्व किया, जैसे:


चंपारण सत्याग्रह (1917)


असहयोग आंदोलन (1920)


दांडी मार्च/नमक सत्याग्रह (1930)


भारत छोड़ो आंदोलन (1942)


🕊️ 🙏